हे बसंत राउर बंदन बा
राउर सत -सत अभिनन्दन बा
बाकि कैसे खुसी मनाई
चारो ओर करुड -क्रंदन बा ,
शुभाष भगत सिंह क देश प्रेम
अब भरसाई में झोक गइल बा
सत्य अहिंसा गाँधी के छाती में छूरी भोक गइल बा
मद्द- पान ब्याभिचार-घोटाला
देश-भक्त के मनोरंजन बा ,हे ........
गली गली बारूद बिछल बा
बम क धुआ आकासे बा
उग्राबाद के डंका बजल
बिप्पल होत कुलासे बा ,हे .........
इमान बिकत बा धर्म बिकत
लास से लेके कफ़न बिकत बा
जालिम पेट भरे के खातिन
देखा नाजुक बदन बिकत बा , हे .........
कवी के इहे बुझाला केहू के ना
कौनो बंधन बा हे ........बसंत..........
दानवीर गौतम
Thursday, August 26, 2010
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